न्यूयॉर्क: जब 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के विजेताओं ने संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की थी, तब दुनिया में मात्र 51 देश थे। आज 193 सदस्य देशों वाली इस संस्था की 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद (UNSC) में केवल 5 देशों (P5 - अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस) के पास वीटो पावर है। यह ढांचा 21वीं सदी की वैश्विक चुनौतियों से निपटने में पूरी तरह अक्षम साबित हो रहा है।

भारत की स्थायी सदस्यता का अकाट्य दावा

  • दुनिया की सबसे बड़ी आबादी: 1.4 अरब से अधिक नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले देश को बाहर रखकर वैश्विक निर्णय लेना अलोकतांत्रिक है।
  • पांचवीं सबसे बड़ी और सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक विकास में भारत की केंद्रीय भूमिका।
  • शांति सेना (UN Peacekeeping) में योगदान: संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भारत ने ऐतिहासिक रूप से सर्वाधिक सैनिक और पुलिस बल भेजा है।

जी-4 देश (भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील) अफ्रीकी संघ के साथ मिलकर सुरक्षा परिषद में तात्कालिक विस्तार और सुधार के लिए वैश्विक दबाव बना रहे हैं।