नई दिल्ली / नागपुर: आयुष मंत्रालय कल 23 सितंबर को महाराष्ट्र के नागपुर में “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” विषय के तहत 11वें आयुर्वेद दिवस समारोह की भव्य मेजबानी करेगा। पूरे भारत और विश्वभर में आयोजित होने वाले इन समारोहों में प्रमुख आयुर्वेद संस्थान, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, चिकित्सक और अंतर्राष्ट्रीय हितधारक व्यापक रूप से भाग लेंगे।

आयुर्वेद से स्वस्थ कल: साक्ष्य, अनुसंधान और नवाचार पर विशेष ध्यान

नागपुर में आयोजित होने वाले मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम में “आयुष सेवा क्षेत्र” पर पहली बार तैयार की गई व्यापक रिपोर्ट का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। इस ऐतिहासिक रिपोर्ट को विकासशील देशों के लिए अनुसंधान और सूचना प्रणाली (आरआईएस - RIS) ने तैयार किया है, जो देश और दुनिया में आयुष सेवा क्षेत्र की आर्थिक व चिकित्सीय क्षमता का विस्तृत आकलन प्रस्तुत करती है।

इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम में पारंपरिक औषधियों के मानकीकरण और सुरक्षा के तहत निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलों का विमोचन किया जाएगा:

  • सुरक्षा डोज़ियर (Safety Dossiers): औषधीय पौधों गोक्षुर (Tribulus terrestris) और चंद्रसूर (Lepidium sativum) पर वैज्ञानिक सुरक्षा डोज़ियर जारी होंगे।
  • मानक उपचार दिशानिर्देश (Standard Treatment Guidelines): त्वचा विकारों (Skin Disorders) के आयुर्वेद आधारित मानकीकृत उपचार प्रोटोकॉल का शुभारंभ।
  • आयुष विजन 2030 रिपोर्ट: “पारंपरिक ज्ञान से वैश्विक नेतृत्व तक: आयुष विजन 2030” शीर्षक वाली नीतिगत रिपोर्ट तथा भारत में आयुष-संबंधित वैज्ञानिक आविष्कारों पर स्थिति रिपोर्ट का अनावरण।
  • सीसीआरएएस-अग्नि वेब पोर्टल: केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) की महत्वाकांक्षी 'आयुर्वेद ज्ञान नैपुण्य पहल' (AGNI) आकलन स्केल वेब पोर्टल का शुभारंभ, जो चिकित्सकों के क्लिनिकल अनुभवों को साक्ष्य-आधारित अनुसंधान में बदलने का काम करेगा।

दो प्रमुख वैज्ञानिक सत्रों का आयोजन

समारोह के दौरान वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए दो उच्चस्तरीय वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए जाएंगे:

  1. वैज्ञानिक सत्र I: “शाश्वतम से विश्वास तक - स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद और 2047 की ओर मार्ग”—जिसमें स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को वैश्विक समग्र स्वास्थ्य (Holistic Healthcare) का सिरमौर बनाने की रूपरेखा पर विचार होगा।
  2. वैज्ञानिक सत्र II: “2027 तक एनसीडी (गैर-संचारी रोग / Non-Communicable Diseases) के बोझ को कम करने के लिए उपचारों का एकीकरण आवश्यक”—जिसमें आधुनिक चिकित्सा के साथ आयुर्वेद के समन्वय पर नीतिगत चर्चा होगी।

समारोह में आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न राष्ट्रीय परिषदों के प्रतिनिधि, मेडिकल कॉलेजों के निदेशक और आयुर्वेद पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े प्रमुख विशेषज्ञ उपस्थित रहेंगे। यह मंच प्राचीन भारतीय पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को आधुनिक साक्ष्यों के साथ दुनिया के सामने प्रस्तुत करने में मील का पत्थर साबित होगा।

स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (Press Information Bureau - PIB), भारत सरकार (रिलीज़ आईडी: 2313627)