भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक नया और व्यापक शहरी ग्रोथ मॉडल प्रस्तुत किया है। अब तक जहां सरकार का ध्यान मुख्यतः बड़े औद्योगिक घरानों को राज्य में लाने और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट जैसे बड़े आयोजनों तक सीमित था, वहीं इस नए मॉडल में शहरी क्षेत्रों, टियर-2 और टियर-3 नगरों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने, और व्यापार की राह में आने वाली हर अड़चन को दूर करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।

सरकार ने इस मॉडल को महज एक नीतिगत दस्तावेज़ तक सीमित न रखकर ज़मीनी स्तर पर लागू करने की कोशिश शुरू कर दी है। इसके लिए इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 'अर्बन कॉन्क्लेव' का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री ने स्वयं निवेशकों, स्टार्टअप संस्थापकों, शहरी नियोजन विशेषज्ञों और उद्योग जगत के दिग्गजों से एक-एक करके सीधी बातचीत की।

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क्या है यह नया शहरी ग्रोथ मॉडल?

सरल शब्दों में कहें तो पहले का तरीका ऐसा था जैसे कोई व्यापारी केवल बड़े शहरों की मुख्य सड़कों पर दुकान खोलने पर ध्यान दे। मोहन यादव का नया मॉडल उस गली-मोहल्ले की दुकान को भी उतना ही साफ, सुविधाजनक और मुनाफेदार बनाने की बात करता है — यानी छोटे और मझोले शहरों को भी निवेश के लिए उतना ही आकर्षक बनाना जितना भोपाल या इंदौर हैं।

इस मॉडल के तीन मुख्य स्तंभ हैं: पहला — शहरी इलाकों में नियोजित और टिकाऊ विकास; दूसरा — व्यापार करने में आसानी (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) से आगे बढ़कर व्यापार करने में विश्वास (कॉन्फिडेंस ऑफ डूइंग बिजनेस); और तीसरा — सरकारी प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण और पारदर्शिता।

अर्बन कॉन्क्लेव: निवेशकों से सीधा संवाद

इंदौर में आयोजित 'अर्बन कॉन्क्लेव' इस नए दृष्टिकोण का सबसे महत्वपूर्ण व्यावहारिक उदाहरण रहा। इस मंच पर मुख्यमंत्री ने रियल एस्टेट डेवलपर्स, इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों, आईटी फर्मों और ग्रीन एनर्जी उद्यमों के साथ व्यक्तिगत चर्चा की। इसका मकसद था कि हर निवेशक की समस्या को सीधे सुना जाए और उसका समाधान बिना लंबी फाइलों के दिया जाए।

यह ठीक उसी तरह था जैसे किसी बैंक में आम दिनों में लंबी कतार लगती है, लेकिन प्रीमियम बैंकिंग में ग्राहक को सीधे रिलेशनशिप मैनेजर मिलता है जो उसकी हर जरूरत खुद पूरी करता है। सरकार ने निवेशकों को यही 'प्रीमियम सेवा' का एहसास दिलाने की कोशिश की।

टियर-2 शहरों पर विशेष जोर: संतुलित विकास की ओर

मोहन यादव के इस नए मॉडल की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि यह केवल भोपाल और इंदौर तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार ने जबलपुर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर और रीवा जैसे टियर-2 शहरों को भी इस विकास यात्रा का अभिन्न हिस्सा बनाया है।

इन शहरों के लिए सरकार ने आधुनिक मास्टर प्लान तैयार किए हैं, जिनमें ट्रांसपोर्ट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD), फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) का अनुकूलन, और ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (TDR) जैसे आधुनिक शहरी नियोजन उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। इन तकनीकी शब्दों को सरल भाषा में समझें तो:

आसान शब्दों में समझें: TOD का मतलब है बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन या मेट्रो के आसपास घनी और मिश्रित-उपयोग की इमारतें बनाना — जैसे ऊपर दफ्तर, नीचे दुकान, बगल में घर। FAR तय करता है कि एक भूखंड पर कितनी मंज़िलें बन सकती हैं। और TDR वह व्यवस्था है जिसमें अगर कोई ज़मीन सड़क या पार्क के लिए छोड़ी जाए तो उस जमीन के बदले कहीं और निर्माण का अधिकार मिल जाता है — बिल्कुल बैंक के बदले में दूसरा खाता खोलने जैसा।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: कागज़ से ज़मीन तक

मध्य प्रदेश केंद्र सरकार के DPIIT (उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग) की व्यापार सुधार कार्य योजना (BRAP) में 'टॉप अचीवर' राज्यों की श्रेणी में शामिल है। लेकिन मोहन यादव सरकार इस रैंकिंग को केवल प्रमाण-पत्र मानने की बजाय इसे ज़मीनी हकीकत बनाने पर जोर दे रही है।

  • सिंगल विंडो सिस्टम (Invest MP Portal): राज्य ने sws.invest.mp.gov.in पोर्टल के ज़रिए सभी विभागों की एनओसी, लाइसेंस और पंजीकरण एक ही छत के नीचे उपलब्ध करा दिए हैं। यह पोर्टल केंद्र सरकार के राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) से भी जुड़ा है।
  • पुराने कानूनों की छुट्टी: व्यापारियों के रास्ते में अड़चन बनने वाले सैकड़ों अप्रचलित कानूनों और हजारों अनावश्यक सर्कुलर को समाप्त किया गया है।
  • 25 से अधिक नई नीतियां: आईटी, डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे भविष्यमुखी क्षेत्रों के लिए 25 से अधिक प्रगतिशील क्षेत्रीय नीतियां लागू की गई हैं।
  • सब्सिडी का डीबीटी से भुगतान: निवेशकों को मिलने वाली सब्सिडी अब सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से दी जा रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है।
  • GIS आधारित भूमि आवंटन: MPIDC का लैंड बैंक अब केंद्र सरकार के 'इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक' के GIS प्लेटफॉर्म से जुड़ा है, जिससे निवेशक घर बैठे ज़मीन की उपलब्धता और उसकी सारी जानकारी ऑनलाइन देख सकते हैं।
निवेशकों के लिए मध्य प्रदेश की ताकत

मुख्यमंत्री ने मुंबई, बेंगलुरु और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रोडशो कर निवेशकों के सामने मध्य प्रदेश की प्रतिस्पर्धी विशेषताएं रखी हैं:

  • 1 लाख एकड़ से अधिक का लैंड बैंक: उद्योग और शहरी विस्तार के लिए सरकार के पास विशाल भूमि भंडार है।
  • 1.1 करोड़ से अधिक MSME रोज़गार: राज्य में पहले से मजबूत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों का जाल फैला है।
  • निर्बाध और सस्ती बिजली: उद्योगों के लिए अबाध विद्युत आपूर्ति सरकार की प्राथमिकता है।
  • शांत श्रम परिवेश: कुशल और स्थिर श्रम बल निवेशकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण है।
उज्जैन सिंहस्थ 2028: विशेष अवसर

मोहन यादव के शहरी विकास एजेंडे में उज्जैन को विश्वस्तरीय तीर्थ नगरी के रूप में विकसित करना एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में डिजिटल ट्विन मॉडलिंग, टेम्पर बॉन्ड और स्मार्ट सिटी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी अत्याधुनिक योजनाओं पर काम शुरू हो चुका है। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन बल्कि आतिथ्य, रिटेल और सेवा क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर निवेश की संभावना है।

हरित और जलवायु-अनुकूल शहर: दीर्घकालिक दृष्टि

यह मॉडल केवल धन और उद्योग तक सीमित नहीं है। सरकार ने शहरी विकास को पर्यावरण के साथ जोड़ने पर भी जोर दिया है। अमृत 2.0 योजना के तहत जल सुरक्षा, ठोस कचरा प्रबंधन, कचरे से ऊर्जा उत्पादन (Waste-to-Energy), कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG), इलेक्ट्रिक वाहन अवसंरचना और सिटी फॉरेस्ट जैसी पहलें इस ग्रोथ मॉडल का अभिन्न हिस्सा हैं।

रोज़मर्रा की ज़िंदगी से उदाहरण: इसे ऐसे समझिए — एक परिवार जब नया घर बनाता है तो केवल दीवारें नहीं उठाता, बल्कि बिजली, पानी, हवा-रोशनी और कचरे के निस्तारण की भी व्यवस्था करता है। सरकार का यह मॉडल ठीक इसी तरह शहरों को 'पूरे घर' की तरह बनाना चाहता है, न कि सिर्फ दिखावटी दीवारें खड़ी करना।

आम नागरिक और उद्यमी के लिए क्या बदलेगा?

इस पूरे बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसका सीधा असर आम नागरिक और छोटे उद्यमी पर पड़ेगा। जब किसी शहर में निवेश बढ़ता है तो सड़कें बेहतर होती हैं, रोजगार के नए अवसर आते हैं, और स्थानीय व्यापार को भी बाज़ार मिलता है।

  • नए उद्योगों से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।
  • बेहतर शहरी बुनियादी ढांचे से आवागमन और जीवन स्तर सुधरेगा।
  • छोटे व्यापारियों को सरल लाइसेंसिंग प्रक्रिया का लाभ मिलेगा।
  • डिजिटल गवर्नेंस से सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम होंगे।
निष्कर्ष

डॉ. मोहन यादव का यह नया ग्रोथ मॉडल मध्य प्रदेश के शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है। 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' से आगे बढ़कर 'कॉन्फिडेंस ऑफ डूइंग बिजनेस' की सोच, टियर-2 शहरों पर ध्यान, डिजिटल प्रशासन और हरित शहरी ढांचे का यह संयोजन — अगर सफलतापूर्वक लागू हो जाता है — तो मध्य प्रदेश देश के सबसे तेज़ी से उभरते निवेश गंतव्यों में अपनी जगह पक्की कर सकता है। अब असली परीक्षा यह है कि घोषणाओं और कॉन्क्लेव की चमक ज़मीनी हकीकत में कितनी जल्दी और कितनी ईमानदारी से बदल पाती है।