विचार मंच: इंटरनेट के शुरुआती तीन दशकों में यह धारणा बन गई थी कि डिजिटल दुनिया केवल अंग्रेजी जानने वालों के लिए है। लेकिन स्मार्टफोन की सुलभता और भारतीय भाषाओं में वॉयस सर्च व एआई ट्रांसलेशन के प्रसार ने इस धारणा को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। आज भारत में 90% नए इंटरनेट उपयोगकर्ता अपनी मातृभाषा में सामग्री तलाश रहे हैं।

भाषा केवल संवाद नहीं, संस्कृति की आत्मा है

जब कोई व्यक्ति अपनी मातृभाषा में सोचता और सीखता है, तो उसकी मौलिकता और रचनात्मकता चरम पर होती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) द्वारा इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई भारतीय भाषाओं में शुरू करने की पहल ने भाषाई हीनभावना को दूर करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।

भाषाई तकनीक में रोजगार के असीम अवसर

  • कंटेंट क्रिएशन और डिजिटल पत्रकारिता: प्रादेशिक भाषाओं में यूट्यूब, पॉडकास्ट और समाचार पोर्टलों की पाठक संख्या अंग्रेजी से दस गुना अधिक है।
  • एआई लैंग्वेज मॉडलिंग: "भाषिणी" (Bhashini) जैसे राष्ट्रीय एआई मिशनों के जरिए भारतीय भाषाओं के डेटासेट तैयार करने वाले भाषाविदों और अनुवादकों की भारी मांग।

हिंदी और अन्य भारतीय भाषाएं अब केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि 21वीं सदी के ज्ञान और वैश्विक वाणिज्य का सशक्त माध्यम बन चुकी हैं।