रांची / रोहतक: भारत की वास्तविक खेल प्रतिभा एयर-कंडीशनर जिमों में नहीं, बल्कि मिट्टी के अखाड़ों, धूल भरे मैदानों और जनजातीय जंगलों में फलती-फूलती है। "खेलो इंडिया" योजना ने देश के इसी छिपे हुए खेल खजाने को तलाशने और तराशने का काम किया है।

तीरंदाजी में जनजातीय युवाओं की प्राकृतिक प्रतिभा

झारखंड और छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में बांस के धनुष से निशाना साधने वाले बच्चों को जब आधुनिक रिकर्व और कंपाउंड धनुष थमाए गए, तो उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में रिकॉर्ड निशाने साधे। दीपिका कुमारी और कोमैलिका बारी इसी मिट्टी की देन हैं।

हरियाणा का अखाड़ा कल्चर

  • महिला कुश्ती में क्रांति: विनेश फोगाट और अंतिम पंघाल जैसी पहलवानों ने साबित किया है कि अखाड़ों में बेटियां किसी से कम नहीं हैं।
  • एथलेटिक्स में स्वर्ण युग: नीरज चोपड़ा के भाला फेंक में ओलंपिक स्वर्ण पदक ने देश के लाखों ग्रामीण युवाओं को जेवलिन थ्रो अपनाने के लिए प्रेरित किया है।