नई दिल्ली: 21वीं सदी की वैश्विक राजनीति शीतयुद्ध के दो ध्रुवों से निकलकर एक जटिल और अप्रत्याशित "बहुध्रुवीय विश्व" (Multipolar World) में प्रवेश कर चुकी है। इस संक्रमण काल में भारत की विदेश नीति दुनिया भर के कूटनीतिज्ञों के अध्ययन का विषय बन गई है।

मल्टी-एलाइनमेंट (Multi-Alignment) की सफलता

भारत एक ओर अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ क्वाड (QUAD) का सक्रिय सदस्य है, तो दूसरी ओर रूस और चीन के साथ ब्रिक्स (BRICS) और एससीओ (SCO) मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है। किसी भी खेमे में शामिल हुए बिना भारत ने अपने 140 करोड़ नागरिकों के ऊर्जा और रणनीतिक हितों को हमेशा सर्वोपरि रखा है।

ग्लोबल साउथ का सच्चा प्रतिनिधित्व

  • अफ्रीकी संघ को जी-20 की स्थायी सदस्यता: भारत की अध्यक्षता में अफ्रीकी संघ को विश्व के शीर्ष आर्थिक मंच पर स्थान दिलाना भारतीय कूटनीति की सबसे बड़ी नैतिक विजय है।
  • वैक्सीन और खाद्य सुरक्षा: वैश्विक संकट के समय विकासशील और गरीब देशों को अनाज व जीवन-रक्षक दवाएं भेजकर भारत ने "विश्व मित्र" की साख अर्जित की है।

भारत आज केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक संतुलन का अनिवार्य ध्रुव बन चुका है।