दुबई: नई दिल्ली जी-20 शिखर सम्मेलन में घोषित भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) आधुनिक विश्व का सबसे महत्वाकांक्षी व्यापार मार्ग माना जा रहा है। यह गलियारा भारत के पश्चिमी तट से यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन और इजरायल होते हुए सीधे यूरोप के ग्रीस बंदरगाह को जोड़ेगा।
लाल सागर में जहाजों पर हमले और नई जरूरत
हाल के दिनों में बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों ने स्वेज नहर मार्ग को असुरक्षित और महंगा बना दिया है। जहाजों को अफ्रीका का चक्कर लगाकर (Cape of Good Hope) जाना पड़ रहा है, जिससे माल ढुलाई का समय 15 दिन और लागत 40% बढ़ गई है। ऐसे में आईमैक जैसे सुरक्षित वैकल्पिक थल-जल मार्ग की अनिवार्यता और बढ़ गई है।
आईमैक की तीन प्रमुख धमनियां
- रेल और बंदरगाह लिंक: माल की ढुलाई 40% तेजी से होगी और लॉजिस्टिक्स खर्च में भारी कमी आएगी।
- क्लीन हाइड्रोजन पाइपलाइन: मध्य पूर्व और भारत से यूरोप को ग्रीन हाइड्रोजन निर्यात करने का ढांचा।
- हाई-स्पीड डिजिटल डेटा केबल: एशिया और यूरोप के बीच सबसे सुरक्षित डेटा संचार नेटवर्क।
भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद सभी भागीदार देश इस परियोजना के तकनीकी सर्वेक्षण को आगे बढ़ा रहे हैं।