चेन्नई: 64 खानों के खेल शतरंज का जन्म प्राचीन भारत में "चतुरंग" के रूप में हुआ था। आज सहस्राब्दियों बाद भारत एक बार फिर शतरंज की निर्विवाद महाशक्ति बनकर उभरा है। 17 वर्षीय डी गुकेश का कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतकर सबसे कम उम्र में विश्व चैंपियनशिप चैलेंजर बनना इस क्रांति का सबसे रोमांचक अध्याय है।

चेन्नई: दुनिया की शतरंज राजधानी

विश्वनाथन आनंद के पहले ग्रैंडमास्टर बनने के बाद भारत में जो चिंगारी जली थी, वह आज दावानल बन चुकी है। देश में आज 85 से अधिक ग्रैंडमास्टर्स हैं, जिनमें से अधिकांश 20 वर्ष से कम आयु के हैं। चेस ओलंपियाड में पुरुष और महिला दोनों वर्गों में भारत का दोहरा ऐतिहासिक स्वर्ण पदक इसकी पुष्टि करता है।

सफलता का राज: कंप्यूटर इंजन और माता-पिता का समर्पण

  • एआई चेस इंजनों से तैयारी: भारतीय युवा खिलाड़ी स्टॉकफिश और लीला चेस जैसे सुपर-इंजनों की मदद से दिन में 10-12 घंटे नई चालों का विश्लेषण करते हैं।
  • पारिवारिक त्याग: रमेशबाबू प्रज्ञानानंद और वैशाली की सफलता में उनकी मां नागलक्ष्मी के त्याग की कहानी पूरी दुनिया के खेल प्रेमियों को प्रेरित कर रही है।