वाराणसी: भारत की जीवनरेखा कही जाने वाली पवित्र गंगा नदी की स्वच्छता के लिए शुरू किए गए "नमामि गंगे" मिशन के दूसरे चरण ने ठोस परिणाम देने शुरू कर दिए हैं। उत्तराखंड से लेकर पश्चिम बंगाल तक गंगा किनारे बसे प्रमुख शहरों में 150 से अधिक आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) सक्रिय हो चुके हैं।

कानपुर का जाजमऊ और सीसामऊ नाला: बदलाव की मिसाल

कानपुर का कुख्यात सीसामऊ नाला, जिससे प्रतिदिन 14 करोड़ लीटर जहरीला सीवेज गंगा में गिरता था, उसे पूरी तरह डायवर्ट कर ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ दिया गया है। आज उस स्थान पर गंगा का जल आचमन और स्नान योग्य श्रेणी में आ चुका है।

जलीय जैव-विविधता की बहाली

  • गंगा डॉल्फिन की बढ़ती संख्या: जल में घुलित ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) का स्तर बढ़ने से संकटग्रस्त गंगा डॉल्फिन और घड़ियालों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
  • अर्थ गंगा मॉडल: नदी तटों पर प्राकृतिक व जैविक खेती को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने और रासायनिक उर्वरकों के बहाव को रोकने का प्रयास सफल हो रहा है।