मध्य प्रदेश की विशेष कार्य बल (STF) ने फर्जी पासपोर्ट रैकेट में एक नया और चौंकाने वाला अध्याय उजागर किया है। जांच एजेंसी अब मुख्य आरोपी गुलाबराय गौतम उर्फ सम्यक बोधि भंते के बैंक खातों की गहरी पड़ताल में जुट गई है। इस पड़ताल का मकसद है — यह पता लगाना कि पैसा कहाँ से आया, कहाँ गया, और क्या देश की सीमाओं के बाहर तक इसके तार जुड़े हैं। जाँच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट ने न केवल भारतीय पासपोर्ट का दुरुपयोग किया, बल्कि थाईलैंड और म्यांमार तक विदेश यात्राएँ भी कीं। यह मामला अब महज एक स्थानीय फर्जीवाड़े की सीमा से बाहर निकलकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक संवेदनशील विषय बन चुका है।

क्या है पूरा मामला?

साल 2021 से 2023 के बीच मध्य प्रदेश के भोपाल, ग्वालियर, डबरा, बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जैसे जिलों में बौद्ध मठों और विहारों के पतों का इस्तेमाल करते हुए करीब 70 से अधिक फर्जी पासपोर्ट जारी कराए गए। इनमें से अधिकतर पासपोर्ट संदिग्ध विदेशी नागरिकों — विशेषकर बांग्लादेशी मूल के व्यक्तियों — के लिए बनाए गए थे। ये लोग झूठे नाम, झूठे पते और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय नागरिकता का सबूत जुटाकर पासपोर्ट हासिल करने में सफल हो गए।

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इसे ऐसे समझें — जैसे किसी रेलवे स्टेशन की क्लॉकरूम में बैग जमा करने पर एक टोकन मिलता है, और वह टोकन असली सामान की पहचान बन जाता है। ठीक उसी तरह, इन फर्जी दस्तावेजों ने एक नकली पहचान बनाई जो सरकारी प्रणाली के लिए 'असली' दिखती थी। पासपोर्ट वेरिफिकेशन का पूरा तंत्र इस धोखे के सामने बेबस हो गया।

सम्यक बोधि भंते: कौन है यह शख्स?

मुख्य आरोपी गुलाबराय गौतम, जो सम्यक बोधि भंते के नाम से जाना जाता था, मूलतः ग्वालियर और झांसी क्षेत्र का रहने वाला है। बौद्ध भिक्षु का वेश धारण करके वह डबरा के एक बौद्ध मठ में सक्रिय था। STF ने उसे छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी से पहले मध्य प्रदेश सरकार ने उस पर 20,000 रुपये का इनाम घोषित किया था।

सम्यक पर आरोप है कि उसने इस रैकेट के मुख्य सरगना रियाल चौधरी उर्फ मित्यानंद भिक्षु के साथ मिलकर पूरे सिंडिकेट को संचालित किया। उसकी भूमिका दोहरी थी — एक तरफ वह फर्जी पासपोर्ट आवेदनों में झूठी गवाह (witness) के रूप में हस्ताक्षर करता था, और दूसरी तरफ अपना बैंक खाता इस रैकेट को किराए पर देता था।

STF के रडार पर बैंक अकाउंट: मनी ट्रेल क्या बताती है?

जाँच में सबसे अहम कड़ी है — मनी ट्रेल। यानी पैसे की वह डोर जो एक जगह से दूसरी जगह जाती है और अपराध का नक्शा उघाड़ती है।

आसान शब्दों में समझें: जिस तरह किसी पानी के टैंकर की सप्लाई का पता उसके रूट से लगाया जाता है — कहाँ से भरा, किसने दिया, कहाँ पहुँचा — उसी तरह बैंक खातों के लेन-देन का रिकॉर्ड यह बताता है कि पैसा किसने दिया, किसने लिया और आगे कहाँ ट्रांसफर हुआ।

  • सम्यक बोधि ने अपना बैंक खाता इस सिंडिकेट को प्रतिमाह 10,000 रुपये के कमीशन पर किराए पर दे रखा था।
  • विदिशा स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शाखा सहित कई बैंकों में उसके खाते थे, जिनमें से लाखों रुपये के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा हुआ है।
  • प्रत्येक फर्जी पासपोर्ट बनवाने के एवज में एजेंटों ने 20,000 से 50,000 रुपये तक वसूले।
  • STF को आशंका है कि इस धनराशि का एक हिस्सा पासपोर्ट ऑफिस के कर्मचारियों और पुलिस वेरिफिकेशन अधिकारियों को रिश्वत के रूप में पहुँचाया गया।
  • जांच एजेंसी यह भी जानना चाहती है कि क्या इस नेटवर्क में हवाला ऑपरेटर या अन्य वित्तीय बिचौलिए सक्रिय थे।
पासपोर्ट ऑफिस की मिलीभगत? सिस्टम में कहाँ चूक हुई?

यह मामला केवल बाहरी ठगों तक सीमित नहीं है। STF की जाँच का दायरा अब पासपोर्ट सेवा केंद्र और पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया तक फैल चुका है। जाँच में पाया गया कि:

  • बौद्ध मठों के पते को इसलिए चुना गया क्योंकि वहाँ पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान सख्त पूछताछ नहीं होती थी।
  • स्थानीय थाना प्रभारियों और वेरिफिकेशन अधिकारियों ने बिना ज़मीनी जाँच के आवेदन मंजूर कर दिए।
  • ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में नसीम अख्तर जैसे पासपोर्ट एजेंट सक्रिय थे, जो नेटवर्क के अंदरूनी सूत्रों द्वारा उपलब्ध कराए गए फर्जी क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके पूरे आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी करते थे।
  • आधार कार्ड, पैन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र जैसे आधारभूत दस्तावेज भी फर्जी बनाए गए — जिसका अर्थ है कि जाली पहचान की पूरी श्रृंखला (chain of fraud) तैयार की गई थी।
विदेश यात्रा: थाईलैंड और म्यांमार तक पहुँचे धागे

इस कांड का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इन फर्जी पासपोर्टों का इस्तेमाल करके कुछ संदिग्ध व्यक्तियों ने विदेश यात्राएँ भी कीं। STF ने खुलासा किया है कि रैकेट से जुड़े कुछ ऑपरेटर और लाभार्थी थाईलैंड और म्यांमार तक आते-जाते रहे।

इसमें राहुल प्रकाश उर्फ नृत्य भंते का मामला विशेष रूप से उल्लेखनीय है। बहुजन संघर्ष दल का पूर्व महासचिव रहा यह शख्स भिक्षु का वेश धारण करके भोपाल के फर्जी पते पर पासपोर्ट बनवाने में सफल रहा और विदेश तक हो आया। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह रैकेट केवल पासपोर्ट बनाने तक नहीं, बल्कि उनके सक्रिय दुरुपयोग तक सीमित था।

सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए यह एक गंभीर संकेत है। थाईलैंड और म्यांमार — दोनों देश — अवैध सीमा पार करने के मामलों में चर्चित रहे हैं। यदि इस नेटवर्क के तार उन देशों तक पहुँचते हैं, तो यह केवल एक पासपोर्ट फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि एक जटिल अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।

गिरफ्तारियाँ और जाँच की स्थिति

इस मामले में STF अब तक कई अहम गिरफ्तारियाँ कर चुकी है:

  • रियाल चौधरी उर्फ मित्यानंद भिक्षु — मुख्य सरगना, गिरफ्तार।
  • गुलाबराय गौतम उर्फ सम्यक बोधि भंते — प्रमुख साजिशकर्ता, बिलासपुर से गिरफ्तार।
  • राहुल प्रकाश उर्फ नृत्य भंते — भिक्षु वेश में विदेश यात्रा, गिरफ्तार।
  • नसीम अख्तर — पासपोर्ट एजेंट, ऑनलाइन आवेदन का संचालक, गिरफ्तार।
  • कई अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं, जिन पर STF ने इनाम घोषित किए हैं।
आम नागरिक पर इसका क्या असर पड़ता है?

यह सवाल हर उस पाठक के मन में उठता है जिसने कभी पासपोर्ट बनवाया हो या बनवाने की सोच रहा हो। जब फर्जी दस्तावेजों पर पासपोर्ट जारी होते हैं, तो उसका असर कई स्तरों पर पड़ता है:

  • राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा: अवैध घुसपैठिए भारतीय नागरिक बनकर देश में रह सकते हैं और संवेदनशील जानकारी तक पहुँच सकते हैं।
  • ईमानदार नागरिकों की परेशानी: जब सिस्टम में खामियाँ उजागर होती हैं, तो वेरिफिकेशन प्रक्रिया और सख्त हो जाती है — जिससे आम लोगों को पासपोर्ट बनवाने में ज्यादा समय और मुश्किल का सामना करना पड़ता है।
  • देश की अंतरराष्ट्रीय छवि: यदि भारतीय पासपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठे, तो अन्य देश भारतीय यात्रियों के लिए वीज़ा प्रक्रिया कठोर कर सकते हैं।
जरूरी बात: सतर्क रहें, सावधान रहें

यदि कोई एजेंट आपसे कहे कि वह बिना लाइन के, बिना वेरिफिकेशन के, कम समय में और ज्यादा पैसे में पासपोर्ट दिलवा देगा — तो यह एक चेतावनी संकेत है। ऐसे किसी भी प्रस्ताव को तत्काल स्थानीय पुलिस या पासपोर्ट सेवा केंद्र को रिपोर्ट करें। पासपोर्ट के लिए हमेशा सरकारी वेबसाइट passportindia.gov.in का उपयोग करें और किसी भी बिचौलिए पर भरोसा न करें।

STF की आगे की योजना

STF के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, जाँच के अगले चरण में:

  • सम्यक बोधि के सभी बैंक खातों का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाएगा।
  • उन सभी पासपोर्ट ऑफिस कर्मचारियों और पुलिस अधिकारियों की पहचान की जाएगी, जिन्होंने जाने-अनजाने इस फर्जीवाड़े में भूमिका निभाई।
  • थाईलैंड और म्यांमार में की गई विदेश यात्राओं के विवरण की जाँच इमिग्रेशन विभाग के साथ मिलकर की जाएगी।
  • यदि अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन के साक्ष्य मिले, तो मामले को केंद्रीय एजेंसियों जैसे NIA या IB को सौंपा जा सकता है।

यह मामला मध्य प्रदेश की सीमाओं को पार करके एक राष्ट्रीय और संभवतः अंतरराष्ट्रीय जाँच का विषय बनता जा रहा है। STF का यह अभियान न केवल आरोपियों को सजा दिलाने की दिशा में एक कदम है, बल्कि पासपोर्ट जारी करने की पूरी व्यवस्था में जमे भ्रष्टाचार के जाल को उखाड़ने का भी प्रयास है। देखना यह होगा कि मनी ट्रेल की यह डोर आखिर किन-किन दरवाजों तक जाकर खुलती है।