विचार मंच: जब पश्चिमी देश, जापान और यहां तक कि चीन भी तेजी से बूढ़े हो रहे हैं और वहां कार्यबल (Workforce) की भारी कमी हो रही है, तब भारत के पास 65% आबादी कामकाजी आयु वर्ग (15 से 59 वर्ष) में है। अर्थशास्त्र में इसे "डेमोग्राफिक डिविडेंड" कहा जाता है, जो किसी भी राष्ट्र के इतिहास में केवल एक बार आता है।
समय का सीमित अवसर
यह अवसर हमेशा के लिए नहीं है। अगले 25 से 30 वर्षों में यह खिड़की धीरे-धीरे बंद होने लगेगी। यदि हम इस अवधि में अपने युवाओं को 21वीं सदी के कौशल (AI, डेटा साइंस, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन टेक) से लैस नहीं कर पाए, तो यह लाभांश बेरोजगारी और सामाजिक असंतोष की गंभीर चुनौती में बदल सकता है।
अनिवार्य प्राथमिकताएं
- शिक्षा में आमूलचूल सुधार: रटंत विद्या के स्थान पर व्यावहारिक कौशल, शोध और समस्या समाधान की सोच को प्राथमिक कक्षाओं से ही बढ़ावा देना।
- श्रम सुधार और आसान व्यापार: छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को कानूनी उलझनों से मुक्त करना ताकि वे अधिक नौकरियां पैदा कर सकें।
- महिला कार्यबल भागीदारी: जब तक देश की 50% महिला आबादी अर्थव्यवस्था में पूरी तरह सक्रिय नहीं होगी, तब तक 10% की जीडीपी वृद्धि दर हासिल करना असंभव है।