नई दिल्ली: एक समय था जब अंतरराष्ट्रीय वित्तीय विशेषज्ञ यह मानते थे कि भारत जैसे विशाल और नकद-प्रधान देश में डिजिटल भुगतान सफल नहीं हो सकता। लेकिन आज भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) दुनिया के कुल रियल-टाइम डिजिटल लेन-देन के लगभग 46% हिस्से को अकेले संचालित कर रहा है।

यूपीआई की तकनीकी विशिष्टता

पारंपरिक कार्ड भुगतान प्रणालियों में हर ट्रांजेक्शन पर 2 से 3 प्रतिशत का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) कटता था और सेटलमेंट में 24 से 48 घंटे लगते थे। एनपीसीआई (NPCI) द्वारा विकसित यूपीआई ने बैंक खातों को सीधे वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (VPA) से जोड़कर त्वरित, शून्य-लागत और सुरक्षित 24x7 इंटरऑपरेबल ढांचा खड़ा किया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार

  • सीमा-पार प्रेषण (Cross-Border Remittance): सिंगापुर के PayNow और यूएई के साथ यूपीआई के एकीकरण से विदेशों में रहने वाले भारतीय बिना किसी भारी बैंक शुल्क के पलक झपकते घर पैसे भेज रहे हैं।
  • भारतीय पर्यटकों के लिए सुविधा: एफिल टॉवर (पेरिस) से लेकर दुबई मॉल और भूटान के बाजारों तक भारतीय अब सीधे अपने यूपीआई ऐप से क्यूआर कोड स्कैन करके रुपये में भुगतान कर रहे हैं।
  • वैश्विक DPI का मॉडल: विश्व बैंक और जी-20 देशों ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (आधार, यूपीआई और डिजिलॉकर) को विकासशील देशों के वित्तीय समावेशन के लिए सर्वश्रेष्ठ मॉडल घोषित किया है।

यूपीआई ने यह साबित कर दिया है कि जब तकनीक आम जनता के हित को ध्यान में रखकर बनाई जाती है, तो वह क्रांति ला सकती है।