पुणे: इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक्स के युग में सबसे बड़ी बाधा बैटरी की सीमित ऊर्जा घनत्व (Energy Density), धीमी चार्जिंग गति और आग पकड़ने का जोखिम रही है। वैज्ञानिक और ऑटोमोबाइल दिग्गज अब जिस तकनीक को अंतिम समाधान मान रहे हैं, वह है "सॉलिड-स्टेट बैटरी" (Solid-State Battery)।

लिथियम-आयन बनाम सॉलिड-स्टेट

पारंपरिक बैटरियों में एनोड और कैथोड के बीच तरल रासायनिक इलेक्ट्रोलाइट (Liquid Electrolyte) होता है, जो अत्यधिक गर्म होने पर ज्वलनशील हो जाता है। सॉलिड-स्टेट बैटरियों में तरल के स्थान पर सिरेमिक या ठोस पॉलीमर का सूखा इलेक्ट्रोलाइट प्रयुक्त होता है।

सॉलिड-स्टेट बैटरी के अभूतपूर्व फायदे

  • सुरक्षा में भारी सुधार: तरल न होने के कारण अत्यधिक तापमान या दुर्घटना में भी शॉर्ट सर्किट और आग लगने का खतरा लगभग समाप्त हो जाता है।
  • अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग: एक इलेक्ट्रिक कार को मात्र 10 से 15 मिनट में 80% तक चार्ज किया जा सकेगा, जो पेट्रोल भराने के समय के करीब है।
  • दोगुनी ऊर्जा क्षमता: समान आकार और वजन में यह तकनीक दोगुनी ऊर्जा संग्रहित कर सकती है, जिससे एक चार्ज में 800 से 1000 किमी की रेंज मिलना संभव होगा।
  • दीर्घायु: ये बैटरियां हजारों चार्ज चक्रों के बाद भी अपनी क्षमता बनाए रखती हैं, जिससे बैटरी बदलने का खर्च बचता है।

टोयोटा, सैमसंग और भारतीय अनुसंधान संस्थान इस तकनीक के बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन की तैयारी में हैं, जिससे 2027-2028 तक बाजार में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेंगे।