हैदराबाद: आधुनिक साइबर युद्ध में सबसे खतरनाक हथियार बनकर उभरा है "रैनसमवेयर" (Ransomware)। यह एक ऐसा दुर्भावनापूर्ण मैलवेयर होता है जो किसी कंप्यूटर नेटवर्क में घुसते ही सभी महत्वपूर्ण फाइलों, डेटाबेसों और सिस्टम बैकअप को अत्यधिक मजबूत मिलिट्री-ग्रेड एन्क्रिप्शन से लॉक कर देता है और उन्हें खोलने के लिए क्रिप्टोकरेंसी में भारी फिरौती की मांग करता है।
अस्पतालों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले
एम्स दिल्ली जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं पर हुए रैनसमवेयर हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल आईटी समस्या नहीं, बल्कि सीधे मानवीय जीवन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा संकट है। जब अस्पताल के सिस्टम लॉक होते हैं, तो मरीजों की जांच रिपोर्ट, सर्जरी शेड्यूल और जीवन-रक्षक दवा का डेटा ठप हो जाता है।
रैनसमवेयर से बचाव की 3-2-1 बैकअप रणनीति
- डेटा की 3 प्रतियां: अपने सभी आवश्यक डेटा की कम से कम 3 अलग-अलग कॉपी हमेशा रखें।
- 2 अलग-अलग माध्यम: बैकअप के लिए कम से कम 2 अलग-अलग स्टोरेज मीडिया (जैसे लोकल एनएएस और क्लाउड) का इस्तेमाल करें।
- 1 ऑफलाइन / एयर-गैप्ड कॉपी: कम से कम एक बैकअप कॉपी ऐसी हार्ड ड्राइव या टेप में होनी चाहिए जो इंटरनेट और मुख्य नेटवर्क से पूरी तरह कटी (Air-gapped) हो।
साथ ही, जीरो-ट्रस्ट सिक्योरिटी मॉडल अपनाना और कर्मचारियों को अज्ञात ईमेल अटैचमेंट न खोलने का प्रशिक्षण देना रैनसमवेयर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।