नई दिल्ली: जब पारंपरिक सुपरकंप्यूटर किसी जटिल गणितीय समस्या को हल करने में हजारों वर्ष का समय लेते हैं, तब क्वांटम कंप्यूटर उसी गणना को कुछ ही मिनटों में सुलझा सकते हैं। यह कोई साधारण कंप्यूटर का तेज़ संस्करण नहीं है, बल्कि गणना का एक सर्वथा नया भौतिक सिद्धांत है।
बिट्स बनाम क्यूबिट्स (Bits vs Qubits)
हमारे सामान्य कंप्यूटर सूचना को "बिट्स" (0 या 1) के रूप में संसाधित करते हैं। किसी भी समय एक बिट या तो 0 हो सकता है या 1। इसके विपरीत, क्वांटम कंप्यूटर "क्वांटम बिट्स" या "क्यूबिट्स" (Qubits) का उपयोग करते हैं। क्वांटम यांत्रिकी के नियम "सुपरपोजिशन" के कारण एक क्यूबिट एक ही समय में 0 और 1 दोनों अवस्थाओं में रह सकता है।
क्वांटम सुपरमेसी के प्रमुख सिद्धांत
- सुपरपोजिशन (Superposition): एक साथ अरबों संभावनाओं का विश्लेषण करने की अद्भुत क्षमता।
- एंटैंगलमेंट (Entanglement): दो क्यूबिट्स का आपस में इस तरह जुड़ना कि एक की अवस्था बदलने पर दूसरा तुरंत प्रभावित होता है, भले ही वे कितनी भी दूरी पर हों।
दुनिया पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
क्वांटम कंप्यूटिंग नई बैटरियों के रासायनिक संयोजन, जटिल चिकित्सा अणुओं के डिजाइन और लॉजिस्टिक्स ऑप्टिमाइजेशन में अकल्पनीय सफलता दिला सकती है। साथ ही, यह वर्तमान आरएसए (RSA) एन्क्रिप्शन को कमजोर कर सकती है, जिसके कारण दुनिया भर में अब "पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी" (PQC) पर तेजी से काम हो रहा है। भारत का "नेशनल क्वांटम मिशन" देश को इस दौड़ में शीर्ष पर रखने के लिए समर्पित है।