श्रीहरिकोटा: अंतरिक्ष का अन्वेषण अब केवल सरकारी अंतरिक्ष एजेंसियों तक सीमित नहीं रहा। स्पेस-एक्स की तर्ज पर अब भारत में भी "न्यू-स्पेस" क्रांति आकार ले चुकी है। केंद्र सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने और IN-SPACe प्राधिकरण के गठन के बाद भारतीय स्टार्टअप्स ने तकनीकी नवाचार के नए कीर्तिमान रचे हैं।

अग्निकुल कॉस्मॉस और दुनिया का पहला 3D प्रिंटेड रॉकेट

चेन्नई स्थित स्टार्टअप "अग्निकुल कॉस्मॉस" ने सिंगल-पीस 3D प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन "अग्निबाण" का सफल प्रक्षेपण कर पूरी दुनिया को चौंका दिया। पारंपरिक रॉकेट इंजनों में सैकड़ों पुर्जों को वेल्डिंग करके जोड़ा जाता था, जिसमें महीनों लगते थे। 3D प्रिंटिंग तकनीक से यह जटिल इंजन मात्र 72 घंटे में कंप्यूटर ऑटोमेशन से तैयार हो जाता है।

स्काईरूट एयरोस्पेस: भारत का पहला निजी रॉकेट

हैदराबाद के पूर्व इसरो वैज्ञानिकों द्वारा स्थापित "स्काईरूट एयरोस्पेस" ने 'विक्रम-एस' रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजकर भारत के पहले निजी रॉकेट प्रक्षेपक का गौरव प्राप्त किया। इनका लक्ष्य वैश्विक नैनो और माइक्रो उपग्रहों को न्यूनतम लागत में सटीक कक्षा में स्थापित करना है।

भारतीय स्पेस इकोनॉमी की अपार संभावनाएं

  • लो-अर्थ ऑर्बिट उपग्रह समूह: कृषि निगरानी, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण मैपिंग के लिए भारतीय स्टार्टअप्स खुद के उपग्रह नेटवर्क लॉन्च कर रहे हैं।
  • किफायती प्रक्षेपण सेवाएं: इसरो के भरोसेमंद लॉन्च पैड्स और स्टार्टअप्स के तीव्र नवाचार के संगम से भारत दुनिया का सबसे किफायती स्पेस लॉन्च डेस्टिनेशन बन रहा है।