बेंगलुरु: आज जब आप गूगल पर कुछ खोजते हैं, नेटफ्लिक्स पर फिल्म देखते हैं या यूपीआई से भुगतान करते हैं, तो पर्दे के पीछे जो शक्ति काम कर रही होती है, वह किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी का बंद मालिकाना कोड नहीं, बल्कि "ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर" (Open Source Software) है।

ओपन सोर्स का मूल दर्शन

ओपन सोर्स का अर्थ है ऐसा सॉफ्टवेयर जिसका सोर्स कोड किसी के भी देखने, संशोधित करने और साझा करने के लिए सार्वजनिक रूप से स्वतंत्र उपलब्ध होता है। 1991 में लिनुस टोरवाल्ड्स द्वारा विकसित लिनक्स कर्नेल आज मानवता के इतिहास का सबसे बड़ा सहयोगी प्रोजेक्ट बन चुका है।

ओपन सोर्स क्यों अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय है?

  • हजारों आंखों की समीक्षा (Linus's Law): जब दुनिया भर के लाखों स्वतंत्र प्रोग्रामर कोड की जांच करते हैं, तो सुरक्षा खामियां (Vulnerabilities) तुरंत पकड़ ली जाती हैं।
  • वेंडर लॉक-इन से मुक्ति: सरकारें और कंपनियां किसी एक विदेशी टेक जायंट पर निर्भर रहने के जोखिम से बच जाती हैं।
  • लागत में भारी बचत: महंगे सॉफ्टवेयर लाइसेंस की जगह समुदाय-आधारित समाधानों को अपनाकर बजट की बचत होती है।

भारत सरकार का डिजिटल इंडिया विजन भी ओपन सोर्स को प्राथमिकता देता है। आधार, डिजिलॉकर, कोविन और यूपीआई जैसे भारत के सबसे बड़े डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे ओपन-सोर्स सिद्धांतों पर ही निर्मित हैं।