संसद भवन, नई दिल्ली: देश में बार-बार होने वाले चुनावों से विकास कार्यों में लगने वाली आचार संहिता की रुकावट और अरबों रुपये के सरकारी खर्च को रोकने के लिए "एक राष्ट्र, एक चुनाव" की अवधारणा पर राष्ट्रीय विमर्श तेज हो गया है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है।

समिति की प्रमुख सिफारिशें

  • दो चरणों में चुनाव: पहले चरण में लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएं। इसके 100 दिनों के भीतर दूसरे चरण में स्थानीय निकायों (नगर निगम और पंचायत) के चुनाव संपन्न हों।
  • संवैधानिक संशोधन: अनुच्छेद 83 (संसद के सदनों की अवधि) और अनुच्छेद 172 (राज्य विधानसभाओं की अवधि) में संशोधन का प्रस्ताव।
  • साझा मतदाता सूची: तीनों स्तरों के चुनावों के लिए चुनाव आयोग द्वारा एक ही संयुक्त मतदाता सूची तैयार की जाए।

पक्ष और विपक्ष के प्रमुख तर्क

समर्थकों का तर्क है कि इससे सरकारी खजाने के हजारों करोड़ बचेंगे, सुरक्षा बलों का तनाव कम होगा और नीतिगत पंगुता समाप्त होगी। वहीं विपक्षी दलों का मानना है कि इससे क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय मुद्दों के आगे दब सकते हैं और यह संघीय ढांचे की स्वायत्तता को प्रभावित कर सकता है। आगामी संसद सत्र में इस पर गरमा-गरम बहस तय है।