नई दिल्ली: हम सभी अपने फोन को अनलॉक करने या दफ्तर में हाजिरी लगाने के लिए फिंगरप्रिंट स्कैनर या फेस रिकॉग्निशन का उपयोग करते हैं। लेकिन जैसे-जैसे उच्च-रिज़ॉल्यूशन 3D प्रिंटिंग और सिलिकॉन मोल्ड्स का विकास हुआ है, फिंगरप्रिंट की नकल करना संभव हो गया है। इसके समाधान के लिए अब "पाम-वेन स्कैनिंग" (हथेली की नसों का पैटर्न) सबसे सुरक्षित बायोमेट्रिक तकनीक बनकर उभरी है।
पाम-वेन स्कैनिंग (Palm Vein Authentication) का विज्ञान
प्रत्येक मनुष्य की हथेली की त्वचा के नीचे रक्त वाहिकाओं (Veins) का एक अत्यंत जटिल और अनूठा संजाल होता है, जो जुड़वां बच्चों में भी पूरी तरह भिन्न होता है। निकट-अवरक्त (Near-Infrared) प्रकाश जब हथेली पर पड़ता है, तो रक्त में मौजूद डीऑक्सीजनेटेड हीमोग्लोबिन इस प्रकाश को सोख लेता है, जिससे नसों का एक काला अदृश्य पैटर्न स्कैनर में रिकॉर्ड हो जाता है।
यह तकनीक अधिक सुरक्षित क्यों है?
- सम्पर्क-रहित (Contactless) एवं स्वच्छ: स्कैनर को छूने की आवश्यकता नहीं होती, केवल हथेली ऊपर रखनी होती है, जिससे कीटाणुओं का प्रसार नहीं होता।
- जीवित शरीर की अनिवार्यता (Liveness Detection): नसें केवल तभी दिखती हैं जब उनमें जीवित रक्त प्रवाहित हो रहा हो। मृत या कृत्रिम हाथ से इसे बाईपास नहीं किया जा सकता।
- आंतरिक बायोमेट्रिक: फिंगरप्रिंट त्वचा की बाहरी सतह पर होते हैं जो घिस सकते हैं या कांच पर छूट सकते हैं, जबकि नसें शरीर के भीतर पूरी तरह सुरक्षित होती हैं।
बैंकों के हाई-सिक्योरिटी वॉल्ट्स, हवाई अड्डों और रक्षा प्रतिष्ठानों में इस तकनीक को तेजी से लागू किया जा रहा है।