नई दिल्ली: भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संविधान संशोधन अधिनियम) को नीतिगत समानता का सबसे बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित होने से भारतीय राजनीति का चरित्र बुनियादी रूप से बदलने जा रहा है।
संसद में महिला सांसदों की संख्या होगी दोगुनी
वर्तमान में 17वीं और 18वीं लोकसभा में महिला सांसदों का प्रतिशत मात्र 14% के आसपास है। इस कानून के लागू होते ही 543 सदस्यीय लोकसभा में कम से कम 181 महिला सांसद चुनकर आएंगी। इसी प्रकार राज्य विधानसभाओं में भी एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
लागू होने की प्रक्रिया और परिसीमन
- रोटेशन प्रणाली: आरक्षित सीटें प्रत्येक परिसीमन के बाद रोटेट की जाएंगी, जिससे सभी क्षेत्रों की महिलाओं को अवसर मिले।
- नीति निर्माण में महिला दृष्टिकोण: स्वास्थ्य, शिक्षा, मातृत्व सुरक्षा, पेयजल और बाल विकास जैसे विषयों पर संसद में अधिक प्रभावी और संवेदनशील नीतियां बन सकेंगी।
सभी राजनीतिक दलों ने अब अपने संगठन में महिला विंग को सक्रिय कर भावी महिला नेताओं को तराशने की विशेष कार्यशालाएं शुरू कर दी हैं।