मुंबई: जब दुनिया की प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाएं उच्च मुद्रास्फीति, मंदी के खतरे और सुस्त विकास दर से जूझ रही हैं, तब भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक विकास का सबसे चमकीला सितारा बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, अगले तीन वर्षों में भारत जर्मनी और जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
विकास के दो मुख्य इंजन
- मजबूत घरेलू मांग: 140 करोड़ की विशाल आबादी, बढ़ता मध्यम वर्ग और उपभोग क्षमता भारतीय कंपनियों को घरेलू स्तर पर भारी मांग प्रदान करती है।
- कैपेक्स (Capital Expenditure) पर सरकारी जोर: केंद्र सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे (रेल, सड़क, बंदरगाह और ऊर्जा) पर प्रतिवर्ष ₹11 लाख करोड़ से अधिक का सार्वजनिक पूंजीगत व्यय निजी निवेश को गति दे रहा है।
वैश्विक निवेशकों का विश्वास
चीन के विकल्प के रूप में "चाइना प्लस वन" रणनीति अपनाने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत को अपना प्राथमिक विनिर्माण केंद्र चुन रही हैं। ऐप्पल के आईफोन विनिर्माण का भारत में तेजी से विस्तार इसका सबसे बड़ा प्रमाण है।