मुंबई: जब भी हम कोई फोटो क्लाउड पर सेव करते हैं या डिजिटल पेमेंट करते हैं, वह डेटा हवा में नहीं तैरता, बल्कि भारी-भरकम सर्वर रैक, सुपर-कूलिंग सिस्टम और फाइबर ऑप्टिक तारों से लैस "हाइपरस्केल डेटा सेंटरों" में सुरक्षित रहता है। भारत अब एशिया-प्रशांत क्षेत्र में डेटा सेंटर उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है।

मुंबई और चेन्नई: सबमरीन केबल के प्रवेश द्वार

भारत का लगभग 70% डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर मुंबई और चेन्नई जैसे तटीय शहरों में केंद्रित है। इसका मुख्य कारण समुद्र के भीतर बिछी अंतरराष्ट्रीय सबमरीन केबल्स (Subsea Cables) हैं, जो भारत को मध्य-पूर्व, यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया से सीधे हाई-स्पीड इंटरनेट द्वारा जोड़ती हैं।

डेटा लोकलाइजेशन की अनिवार्यता

  • राष्ट्रीय सुरक्षा: भारतीय नागरिकों का वित्तीय और संवेदनशील डेटा विदेशी धरती पर रखने के बजाय देश की सीमाओं के भीतर रखना कानूनी रूप से अनिवार्य किया गया है।
  • कम लेटेंसी: स्थानीय स्तर पर डेटा प्रोसेस होने से ई-कॉमर्स, ऑनलाइन गेमिंग और स्टॉक ट्रेडिंग में सेकंड के हजारवें हिस्से की भी देरी नहीं होती।
  • अक्षय ऊर्जा का उपयोग: डेटा सेंटरों की विशाल बिजली खपत को देखते हुए अब अधिकांश नए केंद्र ग्रीन एनर्जी (सौर और पवन ऊर्जा) से संचालित किए जा रहे हैं।

नोएडा, हैदराबाद और बेंगलुरु में भी नए डेटा सेंटर पार्क्स तेजी से विकसित हो रहे हैं, जो डिजिटल इंडिया की रीढ़ हैं।