दलाल स्ट्रीट, मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक ऐतिहासिक बदलाव आ चुका है। एक दशक पहले जब भी विदेशी निवेशक (FII) भारतीय बाजार से पैसे निकालते थे, तो सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट आ जाती थी। लेकिन आज घरेलू खुदरा निवेशक (DII और रिटेल इन्वेस्टर) बाजार की सबसे मजबूत चट्टान बन चुके हैं।

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) की शक्ति

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारतीय नागरिक अब हर महीने ₹20,000 करोड़ से अधिक की राशि अनुशासित रूप से म्यूचुअल फंड एसआईपी के जरिए शेयर बाजार में लगा रहे हैं। छोटे शहरों (Tier-2 और Tier-3) के करोड़ों युवा अब फिक्स्ड डिपॉजिट और सोने के पारंपरिक विकल्पों के साथ-साथ इक्विटी को भी धन सृजन का माध्यम बना रहे हैं।

डिजिटल ब्रोकरेज और वित्तीय साक्षरता

  • जीरो-ब्रोकरेज फिनटेक ऐप्स: स्मार्टफोन पर कुछ ही मिनटों में पेपरलेस डीमैट खाता खोलने की सुविधा ने युवाओं को बाजार से जोड़ा।
  • दीर्घकालिक वेल्थ क्रिएशन: निवेशकों में यह परिपक्वता आई है कि बाजार की अल्पकालिक गिरावट में घबराने के बजाय नियमित निवेश जारी रखना चाहिए।