नई दिल्ली: इंटरनेट के सर्वव्यापी विस्तार ने हमारे जीवन को जितना सरल बनाया है, उतनी ही तेजी से साइबर धोखाधड़ी और डेटा चोरी की घटनाएं भी बढ़ी हैं। आज के समय में साइबर अपराधी पारंपरिक हैकिंग के बजाय "सोशल इंजीनियरिंग" का सहारा ले रहे हैं, जिसमें मानवीय मनोविज्ञान और जल्दबाजी का अनुचित लाभ उठाया जाता है।

फ़िशिंग हमलों के आम तौर-तरीके

फ़िशिंग का तात्पर्य फर्जी संदेशों, ईमेल या वेबसाइटों के जरिए उपयोगकर्ताओं से उनका पासवर्ड, ओटीपी या क्रेडिट कार्ड विवरण चुराना है। बिजली बिल कटने की चेतावनी, लॉटरी जीतने का झांसा या बैंक केवाईसी अपडेट करने के नाम पर आने वाले एसएमएस इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

साइबर सुरक्षा के 7 सुनहरे नियम

  1. ओटीपी कभी साझा न करें: बैंक या कोई भी प्रामाणिक सरकारी संस्था कभी भी फोन पर आपसे ओटीपी या सीवीवी नंबर नहीं मांगती।
  2. टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA): सभी प्रमुख ईमेल, सोशल मीडिया और बैंकिंग खातों पर एसएमएस के बजाय ऑथेंटिकेटर ऐप आधारित 2FA अनिवार्य रूप से चालू रखें।
  3. संदिग्ध लिंक्स पर क्लिक न करें: अनजाने नंबरों से आए शॉर्ट-यूआरएल (bit.ly, tinyurl आदि) पर कभी क्लिक न करें।
  4. पासवर्ड हाइजीन: सभी महत्वपूर्ण खातों के लिए मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड का उपयोग करें। एक ही पासवर्ड हर जगह न रखें।
  5. सार्वजनिक वाई-फाई पर सतर्कता: रेलवे स्टेशन या कैफे के मुफ्त पब्लिक वाई-फाई पर कभी भी वित्तीय लेन-देन न करें।
  6. सॉफ्टवेयर अपडेट्स: अपने मोबाइल और लैपटॉप के ऑपरेटिंग सिस्टम व ऐप्स को हमेशा नवीनतम सुरक्षा पैच के साथ अपडेट रखें।
  7. राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन: किसी भी साइबर अपराध का शिकार होने पर तत्काल 1930 डायल करें अथवा cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज कराएं।