चेन्नई: जब हम किसी कारखाने में रोबोट की कल्पना करते हैं, तो हमारे दिमाग में विशालकाय धातु की भुजाएं आती हैं जो एक सुरक्षित बाड़े के पीछे तेज गति से काम करती हैं और जिनके करीब जाना इंसानों के लिए जानलेवा हो सकता है। लेकिन अब उद्योगों में एक नया बदलाव आया है जिसे "कोबॉट्स" या "सहयोगी रोबोट्स" (Collaborative Robots) कहा जाता है।

पारंपरिक रोबोट बनाम कोबॉट्स

कोबॉट्स को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वे बिना किसी सुरक्षा जाली के इंसानों के ठीक बगल में सुरक्षित रूप से काम कर सकें। इनमें उन्नत फोर्स-टॉर्क सेंसर और कंप्यूटर विजन कैमरे लगे होते हैं। यदि कोई इंसान काम के दौरान कोबॉट की भुजा से जरा सा भी टकराता है, तो कोबॉट एक मिलीसेकंड के भीतर तुरंत अपनी गति रोक देता है।

उद्योगों में प्रमुख उपयोग

  • सटीक असेंबली (Precision Assembly): स्मार्टफोन और घड़ियों के अत्यंत सूक्ष्म पुर्जों को नट-बोल्ट कसना, जहां इंसानी हाथ जल्दी थक सकते हैं।
  • गुणवत्ता निरीक्षण (Quality Inspection): हाई-स्पीड कैमरों से निर्मित उत्पाद की सतह पर 0.1 मिमी के खरोंच या दोष को सेकंडों में पकड़ना।
  • स्वास्थ्य सेवा एवं लैब ऑटोमेशन: रक्त नमूनों की जांच, दवाओं की सटीक पैकिंग और सर्जिकल उपकरणों की पैकेजिंग में सहायता।

कोबॉट्स इंसानों की नौकरियां छीनने के बजाय उन्हें थकाऊ और खतरनाक कार्यों से मुक्त कर उच्च-मूल्य वाले रणनीतिक कार्यों के लिए सक्षम बना रहे हैं।