नई दिल्ली: दूरसंचार की दुनिया में हर दशक एक नई पीढ़ी (Generation) लेकर आता है। 5G के व्यापक विस्तार के बाद अब वैज्ञानिक और नीति-निर्माता 6G (Sixth Generation) संचार प्रणाली की रूपरेखा तैयार करने में जुट गए हैं। भारत का "भारत 6G मिशन" इस तकनीक के शुरुआती विकास और वैश्विक पेटेंट में भारत को अग्रणी बनाने का लक्ष्य रखता है।
6G और 5G में मुख्य तकनीकी अंतर
जहां 5G की अधिकतम सैद्धांतिक गति 10 Gbps से 20 Gbps के बीच है, वहीं 6G तकनीक 100 Gbps से लेकर 1 Tbps (टेराबिट प्रति सेकंड) तक की गति प्रदान करने में सक्षम होगी। इसके साथ ही लेटेंसी (Latency) घटकर 1 मिलीसेकंड से भी कम (सब-मिलीसेकंड) हो जाएगी।
संभावित क्रांतिकारी बदलाव
- होलोग्राफिक टेलीकम्युनिकेशन: वीडियो कॉलिंग का स्थान 3D होलोग्राफिक प्रोजेक्शन ले लेगा, जिससे आभासी मुलाकातें बिल्कुल जीवंत प्रतीत होंगी।
- एआई-नेटिव नेटवर्क: नेटवर्क का प्रबंधन पारंपरिक एल्गोरिद्म के बजाय खुद एआई एजेंट करेंगे, जो नेटवर्क ट्रैफिक का पूर्वानुमान लगाकर उसे ऑप्टिमाइज़ करेंगे।
- अंतरिक्ष और टेरेस्ट्रियल एकीकरण: सैटेलाइट और जमीनी टावर्स एक साथ मिलकर दुनिया के सबसे दुर्गम पहाड़ों और महासागरों में भी कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेंगे।
वर्ष 2030 तक 6G के वाणिज्यिक रोलआउट की उम्मीद की जा रही है, जो रोबोटिक सर्जरी और ऑटोनॉमस मोबिलिटी को नया आयाम देगा।