नई दिल्ली: यदि आप किसी स्मार्टफोन के छोटे से कैमरा लेंस को देखें, तो भौतिकी के नियमों के अनुसार उससे एक भारी डीएसएलआर कैमरे जैसी समृद्ध रोशनी और बोकेह इफेक्ट वाली तस्वीर लेना असंभव प्रतीत होता है। लेकिन आधुनिक स्मार्टफोन आज यह चमत्कार रोज कर रहे हैं। इसका श्रेय हार्डवेयर से ज्यादा "कम्प्यूटेशनल फोटोग्राफी" (Computational Photography) को जाता है।

पिक्सल बाइनिंग (Pixel Binning) क्या है?

जब किसी फोन में 108 या 200 मेगापिक्सल का सेंसर लगाया जाता है, तो प्रत्येक पिक्सल का आकार बहुत छोटा हो जाता है, जिससे कम रोशनी में नॉइज़ आने का खतरा रहता है। इसका समाधान निकालने के लिए कंपनियां "पिक्सल बाइनिंग" तकनीक का उपयोग करती हैं, जिसमें 4 या 9 छोटे पिक्सल को मिलाकर एक बड़ा "सुपर पिक्सल" बना दिया जाता है। इससे रात के समय भी अत्यंत स्पष्ट और उजली तस्वीर प्राप्त होती है।

पेरिस्कोप टेलीफोटो जूम का कमाल

स्मार्टफोन की मोटाई मात्र 7 से 8 मिमी होती है, जिसमें 5x या 10x ऑप्टिकल जूम के लिए लंबे लेंस नहीं समा सकते। इसके लिए पेरिस्कोप प्रणाली का उपयोग किया जाता है, जिसमें प्रिज्म की मदद से रोशनी को 90 डिग्री पर मोड़कर फोन के भीतर क्षैतिज (Horizontal) रूप से लेंस तत्वों को व्यवस्थित किया जाता है।

एआई इमेज स्टैकिंग

जब आप शटर बटन दबाते हैं, तो फोन वास्तव में केवल एक तस्वीर नहीं लेता, बल्कि सेकंड के दसवें हिस्से में अलग-अलग एक्सपोजर वाली 10 से 15 तस्वीरें खींचकर न्यूरल इंजन की मदद से उनका सर्वश्रेष्ठ संयोजन तैयार करता है।