जीवविज्ञान की दुनिया में तिलचट्टा (Cockroach) एक ऐसा प्राणी है जो अपने असाधारण उत्तरजीविता कौशल (Survival Mechanism) के लिए जाना जाता है। परमाणु विकिरण से लेकर वर्षों के सूखे तक को झेलने वाले इस कीट के बारे में सबसे चौंकाने वाला वैज्ञानिक तथ्य यह है कि सिर कटने के बाद भी कॉकरोच एक से दो हफ्तों तक आसानी से जीवित रह सकता है।
मनुष्यों और स्तनधारियों के मामले में सिर कटते ही तीन मुख्य कारणों से कुछ ही पलों में मृत्यु हो जाती है: अत्यधिक रक्तस्राव, रक्तचाप में गिरावट और फेफड़ों तक सांस का न पहुंचना। लेकिन कॉकरोच का शरीर इंसानों की तुलना में बिल्कुल अलग तरह से डिज़ाइन है:
1. शरीर के हर हिस्से में स्वतंत्र श्वास नलिकाएं (Spiracles)
मनुष्य सांस लेने के लिए मुंह और नाक पर निर्भर होते हैं, जिनका नियंत्रण मस्तिष्क करता है। इसके विपरीत, कॉकरोच के सिर में कोई फेफड़े नहीं होते। उनके शरीर के प्रत्येक खंड (Segment) के किनारों पर सूक्ष्म छिद्र होते हैं, जिन्हें 'स्पाइरेकल्स' (Spiracles) कहा जाता है। ये छिद्र सीधे श्वासनली (Trachea) से जुड़े होते हैं जो ऑक्सीजन को सीधे ऊतकों तक पहुंचाते हैं। सिर न होने पर भी कॉकरोच सामान्य रूप से सांस लेता रहता है।
2. खुला परिसंचरण तंत्र और थक्का जमने की गति
इंसानों में रक्त धमनियों और नसों के उच्च-दबाव नेटवर्क (Closed High-Pressure System) में बहता है। सिर कटने पर भारी रक्तस्राव से ब्लड प्रेशर शून्य हो जाता है। कॉकरोच में एक ओपन सर्कुलेटरी सिस्टम (Open Circulatory System) होता है जिसमें बहुत कम रक्तचाप होता है। सिर अलग होने पर गर्दन की नसों पर तुरंत थक्का (Clot) जम जाता है और कोई खून नहीं बहता।
3. हर अंग में मिनी-ब्रेन (Ganglia Network)
कॉकरोच की तंत्रिका प्रणाली इंसानों की तरह केवल सिर के मस्तिष्क पर केंद्रित नहीं होती। उनके पूरे शरीर में नर्व टिशू के कई छोटे-छोटे केंद्र होते हैं जिन्हें 'गैंग्लिया' (Ganglia) कहा जाता है। ये गैंग्लिया बिना सिर के भी पैरों को हिलाने, स्पर्श महसूस करने और चलने-फिरने के रिफ्लेक्स को नियंत्रित करते हैं। बिना सिर का कॉकरोच छूने पर तुरंत भागने में सक्षम होता है।
4. तो फिर सिर कटने के बाद कॉकरोच की मौत क्यों होती है?
हैरानी की बात यह है कि कॉकरोच सिर कटने के दर्द या ऑक्सीजन की कमी से नहीं मरता, बल्कि प्यास और भुखमरी से मरता है! सिर न होने के कारण वह पानी नहीं पी सकता। लगभग 10 से 14 दिनों के बाद जब उसके शरीर का पानी पूरी तरह सूख जाता है, तब डिहाइड्रेशन (Dehydration) के कारण अंततः उसकी मृत्यु हो जाती है।